◼️ काव्यरंग :- वक्त

वक्त……

वक्त निकल रहा है
तुझे भी निकलना होगा
कल के सुरज की राह मत देख
खुद जलकर सुरज बनना होगा…
तु अकेले की भिड़ है
हजारों के बराबर
ना थके ना रुके
तुझे चलना है इस पथ पर
खुद के जख्म के लिए खुद मलम बनना होगा…
मन मंजिल पर ध्यान बढा
तु हजार धोखे खायेगा
डर मत परिणामों से
जो होगा देखा जाएगा
गिर कितनी ही बार तु सिर्फ एक बार उठना होगा…
कुछ उधार लेले रोशनी
चमकते इन सितारों से
दोस्त, तेरा लाख सही है पथ
घर मे बैठे बेकारों से
भड़क मत जमाने से तुझे पागल बन के रहना होगा…
जिंदगी मे तेरे सिवा
तेरा कोई बड़ा दुश्मन नहीं
सब को जीतलोगे मगर
खुद को जितना आसान नहीं
दर्द को छुपाकर लक्ष्य के सामने मुस्कुराना होगा…
बता तेरे हिस्से का दर्द कौन उठाएगा?
जंग हैं अकेले की तुम्हें अकेले ही लढना होगा..
लोग तो सिर्फ अर्थी उठाने आएंगे
चीता पर तो तुझे अकेले ही जलना होगा…
कल के सुरज की राह मत देख
खुद जलकर सुरज बनना होगा…

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